Friday, September 14, 2018

世界银行启动保护森林的碳基金

路透社周二报道说,世界银行在巴厘气候会议上启动了一项3亿美元的基金计划,旨在通过保护森林来抗击全球变暖。
世界银行行长 说,如果我们还不重点来保护现存的热带雨林,那么我们减少温室气体排放的可选择方法就在极大地减少。

但抗议者认为,这一做法有着使本土居民土地被剥夺和他们世代祖传的土地变成富人财产的危险。

联合国原住民论坛主席 说,虽然这一碳基金是个好事,但由于相似的计划引发的历史和现存的负面影响,我们非常担心这一基金将如何运作。
塞拉利昂雨林获得西非国家政府无限期的保护,这也是国家通过保护森林以减少排放的首批行动之一。
塞拉利昂总统欧内斯特•巴伊•科罗马表示希望将面积宽达 公顷( 英亩)的戈拉森林建成第二大的国家公园。至少有50种哺乳动物,2000种不同植物及274种鸟类,包括14种濒临灭绝的鸟类将在这里安家落户,受到保护。

戈拉位于塞拉利昂东南面靠近利比里亚边境处,它将被建成计划中国家公园网络的龙头老大。还有6个国家公园建设计划在成形中,希望借此发展旅游业,帮助塞拉利昂从20世纪90年代的内战中恢复过来。

戈拉项目由欧盟、法国政府、英国皇家鸟类保护协会及保护国际美国总部共同出资。
据路透社报道,周一美国前副总统戈尔在领取诺贝尔和平奖时说,现在是时候要停止向地球的战争, 因我们需要和地球和平相处。
他说:”不认识到这一点,就等于说我们已经开始向地球本身宣战。” 他说,我们必须下决心,紧急和迅速地动员我们的现代文明来解决这个问题。此前,国家(资源)只有在战争期间才被动员起来。

戈尔说,这场拯救地球的战役的结果如何就完全看美国和中国两大全球排放大国是否将采取“最大胆的行动” 。
据报道,美国已表示不原意接受碳减排目标的初步协议,这意味着巴厘岛的联合国气候会谈已触及到了一潜在问题。
美国说,由英国和欧盟支持的发达国家到2020年减排25% 到40%的建议是“完全不现实”和“无助的”。其它国家,包括日本,相信也会反对这一做法。

美国希望巴厘会议达成新的线路图。但它表示不会接受严格的目标,不论是在减排方面还是在控制气温上升方面。

欧洲谈判代表说,需要这样的目标来反映这个问题的紧迫性,同时来激励产业对环保技术的投资。

与以往做法不同的是,在一周的非正式会谈后,联合国周末在它的网站上发表了一四页的初步协议。参加该巴厘会议的190多个国家将对该提议进行讨论。

Thursday, September 6, 2018

抗议人士使得亚马逊油管被迫关闭

路透社报导,秘鲁国家能源公司——秘鲁石油,关闭了亚马逊盆地的天然油管线,同时秘鲁政府正企图结束数周来由自然资源引起的抗议。当地公众已封闭道路与河流向政府施压,要求政府撤销新投资法,并修改给予外国能源公司的特许权。

秘鲁石油的官员向路透社透露,一般来说,总长八百五十公里的输油管线一天运送约四万桶石油。亚马逊雨林地区有众多当地和外国能源公司运营。四月以来的公众抗议使他们的产量饱受影响,许多为能源公司服务的船只也被困在丛林河流上。

秘鲁正在鼓励投资,希望完成从石油进口国到出口国的转型。秘鲁刚刚通过一项新的投资法,旨在推动与美国的自由贸易协议。

拍卖遍及全国的矿产及能源开采权的举动使得秘鲁政府遭到环境组织及人权组织的严厉抨击。他们认为开发将会危害环境,并使偏远部落陷于新的致命疾病的危机之中。

政府已宣告洛雷托、亚马逊、乌卡亚力及库斯科等主要地区进入紧急状态,不排除实施戒严、派遣军队以驱散抗议群众。 路透社报道,联合国国际减灾策略组织( )认为,自然灾害的威胁将给各新兴经济体带来大范围的破坏和痛苦。该组织指出,“大部分洪水风险主要集中在亚洲国家, ”预计75 %濒临洪水危险的人群都集中在孟加拉国、印度和中国。
  的报告还表明,由于全球经济衰退,世界各地许多受到威胁的国家已经处于灾难的边缘。据估计,自1990年以来,全球直接受洪水威胁的经济体所占的份额增加了一倍。这个总部位于日内瓦的组织称,相比于20年前,又多了28%的人有失去住房、收入甚至生命的风险。

  指出,在发展中国家约有10亿人住在灾害频生的贫民窟和棚户区。在近年来经济快速增长中,很多国家都忽视了安全标准问题。当地政府对劣质住房、学校及其他建筑视而不见,而贫民区往往位于低地和滑坡易发地区。

该机构预计,气候变化将导致大风暴等气候相关的紧急事件上升,并且“许多城市将面临缺水、能源匮乏、高温、寒潮以及流行性疾病增多的压力”,值得注意的是,上海、达卡和孟买的海平面正在上升。
因为气候变化,大风暴以及和天气有关的紧急情况将增加,并强调 “许多城市地区也将承受水和能源短缺,热浪和寒潮侵袭,以及流行性疾病猖獗的压力。 ”其中上海、达卡和孟买应受到特别关注,因为它们的海平面在上升。

报告说,泰国和印度尼西亚同样面临着洪水的巨大威胁。孟加拉国与中国、印度、菲律宾、缅甸和马达加斯加一起被列为面临最高暴风死亡风险的国家。而最易遭受滑坡死亡的国家是埃塞俄比亚、印度尼西亚和印度。中国和印度是地震死亡风险最大的,其次是印度尼西亚、萨尔瓦多、危地马拉和刚果民主共和国。撒哈拉以南非洲国家则是拥有最多人口和作物遭受干旱危险的国家。
据《新科学家》报道,环保人士称在厄瓜多尔的叶苏尼国家公园,一家石油公司修建的公路在提供免费运输的同时,也导致当地野生动物贸易问题的产生。他们认为,这说明在改变当地社区和环境之前,对计划的间接影响进行评估的重要性。

这条公路长140公里,由美国油气公司Maxus能源始建于90年代初,后来西班牙和阿根廷公司雷普索尔收购了它。通过这条路深入公园,公司得到了瓦拉尼少数民族保护区内的石油储藏。作为回报, 瓦拉尼(或华拉尼)人获得在公路上免费搭车的机会。

虽然这并不少见,但是根据《动物保护》杂志公布的一项研究显示, 修建的道路对叶苏尼的文化和野生动物产生了负面影响。公路建成不久,一个野生动物市场出现在庞贝亚镇,而那是进入保护区的必经之路。瓦拉尼人提供了市场上近一半的肉类,包括野猪 、无尾刺豚鼠和绒毛猴;而当地另一个部落克秋亚则同时出售哺乳动物和鱼类。在厄瓜多尔买卖野生动物是非法的,但法律执行不力。

世界自然保护学会( )的专家埃斯特班·苏亚雷斯指出,真正的问题是市场改变了当地社会。许多人已放弃了半游牧的生活,并在公路附近定居下来。研究人员发现,免费巴士意味着当地居民能够到达更广泛的区域,获取更多的猎物。如果没有交通工具,苏亚雷斯说,他们很可能继续保持自给自足的传统狩猎生活。

苏亚雷斯的最新调查结果表明,交易物种的数量已经大幅下降。他说:“我们认为,持续增长的市场已经对国家公园的野生动物构成威胁”。

Monday, September 3, 2018

कश्मीर में पुलिसवालों को क्यों निशाना बना रहे हैं चरमपंथी

भारत प्रशासित कश्मीर में चरमपंथियों ने इस साल 31 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी. पुलिसकर्मी यहां विद्रोह के दुष्परिणाम झेल रहे हैं.
22 अगस्त को मोहम्मद अशरफ़ डार की उनके ही घर में हत्या कर दी गई. वह ईद का दिन था. 45 साल के सब इंस्पेक्टर अशरफ़ की पोस्टिंग केंद्रीय कश्मीर में थी.
लेकिन, वो अपनी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ छुट्टियां बिताने आए हुए थे. उनका परिवार दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा ज़िले में स्थित लार्वे नाम के छोटे से गांव में रहता है जो धान के खेतों और सेब के बागानों से घिरा हुआ है.
जुलाई 2016 में चरमपंथी बुरहान वानी की मौत के बाद इस इलाके में हिंसा भड़क उठी थी. इसके बाद पुलिसकर्मी, खासकर स्थानीय मुस्लिम, इस हिंसा के सबसे ज्यादा शिकार बने थे.
हाल के महीनों में, उन्हें अपने घरों से दूर रहने या घर जाने पर बेहद सावधानी बरतने के लिए ​बोला गया है.
डार के सहकर्मियों का कहना है कि उन्हें उनके दोस्तों और परिवार ने घर से दूर रहने के लिए कहा था. लेकिन, डार ने कहा था कि उन्हें छुपने की ज़रूरत नहीं है, '
उन्होंने कहा था, 'क्या मैं कोई चोर हूं? मैंने किसी के साथ गलत नहीं किया है.''
अशरफ़ डार के पिता गुलाम क़ाद्रिम कहते हैं, ''घरेलू स्तर पर बढ़े विद्रोह से लड़ रहे एक स्थानीय पुलिसकर्मी की जिंदगी लैंडमाइन से भरी सड़क पर चलने जैसी है.''स्लिम अलगाववादियों ने 1989 से मुस्लिम बहुलवादी कश्मीर में भारतीय शासन के खिलाफ हिंसक अभियान की शुरुआत की थी. यह क्षेत्र भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव का मसला रहा है और भारत ने तीन में से दो युद्ध इसी के लिए लड़े हैं.
भारत पाकिस्तान को कश्मीर में अशांति पैदा करने के लिए जिम्मेदार ठहराता आया है लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है.
दशकों से भारत सरकार ने पुलिसकर्मियों को उनके ही शहरों या पड़ोस के इलाकों में पोस्टिंग नहीं दी है ताकि उनकी और उनके परिवार की पहचान सुरक्षित रखी जा सके.
लेकिन दक्षिण कश्मीर के कई हिस्सों जैसे पुलवामा में स्थानीय युवाओं के विद्रोह से जुड़ने के बाद पुलिसवालों पर हमले के मामले भी बढ़े हैं.
जिस शख़्स ने डार की हत्या की, वो जानता था कि वो कहां रहते हैं. वह चोरी-छिपे उनके घर में घुस गए, उन्होंने मास्क पहना हुआ था, उनके पास बैग थे और उनके कंधों पर राइफल टंगी हुई थी.
जब हमलावर उनके घर में घुसे, तब डार स्थानीय मस्जिद में शाम की नमाज पढ़ रहा था.
हमलावरों ने डार की पत्नी शैला गनी को बंदूक दिखाते हुए बोला, ''अपना मुंह बंद रखो.'' उन्होंने डार के दोनों बेटों 12 साल के जिबरान अशरफ़ और 7 साल के मोहम्मद क़्वेम को कोने में धकेल दिया.
जिबरान ने बताया, ''उन्होंने मेरा हाथ खींचते हुए पूछा कि तुम्हारे पिता कहां हैं.''
जब डार घर लौटे तो उनके साथ उनकी एक साल की बेटी इराज थी. लेकिन, वो लोग डार को जबरदस्ती रसोई में ले गए. तब इराज उनकी गोद में ही थी.
डार अपनी बेटी का जाने नहीं देना चाहते थे लेकिन हत्यारों ने उन्हें चोट मारी और बेटी छीन ली. डार ने उन लोगों से कहा भी था, ''तुम मेरे भाइयों जैसे हो. मैने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है.''
शैला गनी ने बताया कि उस वक्त वह साथ वाले कमरे में थीं और ये सब सुन रही थीं. तभी उन्होंने गोलियां चलने की आवाज़ सुनी और मौके पर ही अशरफ़ डार की मौत हो गई.
दक्षिण कश्मीर के एक गांव मुतलहामा गांव के रहने वाले 68 साल के अब्दुल गनी शाह कहते हैं, ''क्या पुलिसकर्मी कश्मीरी नहीं हैं? उन्हें निशाना बनाकर चरमपंथी अपने मकसद को नुकसान पहुंचा रहे हैं.''
बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर में हिंसा के मामले बढ़ गए हैं. कश्मीरी युवा विरोध के लिए सड़कों पर उतर आए और पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ 'पैलेट गन' का इस्तेमाल किया.
इसके बाद, चरमपंथियों के मारे जाने के मामले भी बढ़े हैं. साल 2017 में 76 चरमपंथी मारे गए थे जो पिछले दशकों की सबसे ज्यादा संख्या थी. इस साल सिर्फ दक्षिण कश्मीर में ही 66 चरमपंथी मारे गए हैं.
इस दौरान, पुलिसकर्मियों पर भी हमले बढ़ने से कश्मीर में 130,000 पुलिसकर्मी भी चिंता में है.
जून 2017 में, सादे कपड़ों में मौजूद मोहम्मद अयूब नाम के एक पुलिस अधिकार को श्रीगनर में भीड़ मार दिया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने कुछ युवाओं से झगड़े के बाद भीड़ पर गोलियां चला दी थीं.
जुलाई 2018 में, कॉन्स्टेबल मोहम्मद सलीम शाह अपने दोस्तों के साथ मछली पकड़ने गए और अचानक ही गायब हो गए. अगले दिन सेब के बागानों में बाइक से कुचला गया उनका शव मिला था.
अधिकारियों के मुताबिक इस साल पुलिसकर्मियों के परिवार के करीब 12 सदस्यों का अपहरण किया गया है.
28 अगस्त को संदिग्ध चरमपंथियों ने दक्षिण कश्मीर के एक पुलिसकर्मी के बेटे को उठा लिया था. पुलिस की जांच में इस अपहरण के तार हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख रियाज़ नाइको से जुड़े मिले. नाइको ने कश्मीरी पुलिसकर्मियों को ''उनकी नौकरी छोड़ने या नतीजे भुगतने'' की धमकी दी थी.
लेकिन, कई कश्मीरी युवा अब भी पुलिस बल में जाना चाहते हैं. इसकी एक वजह हिंसा और कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते नौकरियों की कमी होना भी है.
पुलिस की नौकरी के लिए प्रशिक्षण ले रहे फुरकान अहमद कहते हैं, ''मैं पुलिस में जाना चाहता हूं क्योंकि मुझे मेरे माता-पिता का ख्याल रखना है.''
इस बीच, कश्मीरियों और पुलिस बल के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है. जून में सीआरपीएफ जवानों की जीप के नीचे आने से एक प्रदर्शनकारी की मौत के बाद भी हिंसा भड़क उठी थी.
सीआरपीएफ का कहना था कि जवान अपना बचाव कर रहे थे लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप था कि उन्होंने जानबूझकर भीड़ में जीप चलाई.
डार के पिता क़ाद्रिम कहते हैं, ''मानवता ख़त्म हो चुकी है और कश्मीर में तो ये कब की ख़त्म हो चुकी है.''