Wednesday, December 12, 2018

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

1996 में जब कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप लगे थे तब पार्टी ने छिंदवाड़ा से उनकी पत्नी अलकानाथ को टिकट देकर उतारा था, वो जीत गई थीं लेकिन अगले साल हुए उपचुनाव में कमलनाथ को हार का मुंह देखना पड़ा था. वे छिंदवाड़ा से केवल एक ही बार हारे हैं.
वैसे इस हार के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प बताई जाती है. दरअसल, कमलनाथ चुनाव हार गए थे तो उन्हें तुगलक लेन पर स्थित मिला हुआ बंगला खाली करने का नोटिस मिला, पहले उन्होंने कोशिश की वह बंगला उनकी पत्नी के नाम अलॉट हो जाए लेकिन नियमों के मुताबिक पहली बार चुनाव जीतने वाले लोगों को उतना बड़ा बंगला अलॉट नहीं किया जा सकता था, इसलिए एक साल बाद ही जब हवाला कांड की बात ठंडी हुई तो कमलनाथ ने अपनी पत्नी का इस्तीफ़ा करा दिया. लेकिन उपचुनाव में कमलनाथ को सुंदर लाल पटवा ने हरा दिया था.
इंदिरा गांधी की मौत के बाद कमलनाथ राजीव गांधी के विश्वस्त भी रहे और आज की तारीख़ में राहुल गांधी भी उन पर पूरा भरोसा करते हैं. मनोरंजन भारती बताते हैं, - कमलनाथ तेज़ी से संसाधनों को जुटाने में माहिर हैं. हर पार्टी में उनके अच्छे दोस्त हैं, कारोबारी होने के चलते कारोबार की दुनिया में उनके दोस्त हैं, तो इस लिहाज़ से भी पार्टी की जरूरतों के मुताबिक़ कमलनाथ मुफ़ीद बैठते हैं.
दरअसल, कानपुर में जन्मे और पश्चिम बंगाल में कारोबार करने वाले व्यापारी परिवार से आने वाले कमलनाथ ख़ुद में एक बिज़नेस टायकून हैं, उनका कारोबार रियल एस्टेटस, एविएशन, हॉस्पिटलिटी और शिक्षा तक फैला है. देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईएमटी गाज़ियाबाद के डायरेक्टर सहित क़रीब 23 कंपनियों के बोर्ड में कमलनाथ शामिल हैं. ये कारोबार उनके दो बेटे नकुलनाथ और बकुल नाथ संभालते हैं.
आलोक मेहता कहते हैं- कारोबारी पृष्ठभूमि होने से कमलनाथ हर किसी की मदद करते हैं. उनके घर पर हमेशा ऐसे लोगों की भीड़ लगी रहती है. साथ ही आप ये भी देखिए कि आईएमटी गाज़ियाबाद के ज़रिए उन्होंने कितनों परिवार को समृद्ध किया है. ये उनका सामाजिक योगदान जैसा ही है.
दिल्ली में ये भी बड़ा मशहूर है कि कमलनाथ का घर और दफ्तर चौबीस घंटे पार्टी कार्यकर्ता के लिए खुला रहता है.
आलोक मेहता कहते हैं- अगर किसी नामालूम कार्यकर्ता के छोटे से काम के लिए भी कमलनाथ को चार बार किसी से कहना पड़े तो वो कहते हैं, उनकी ये सहजता भी उनकी बड़ी ताक़त है.
लेकिन मुश्किल ये है कि अपनी हाई प्रोफाइल छवि के चलते कमलनाथ कभी शिवराज सिंह चौहान जितने सहज नहीं हो सकते. शिवराज रात के एक बजे भी अपने कार्यकर्ताओं को रिसीव कर सकते थे, उनके खाने पीने का इंतजाम अपने घर में करवा सकते थे लेकिन जिस कारपोरेट शैली से कमलनाथ आते हैं, वे डाउन टू अर्थ होने के बाद भी शिवराज के करीब नहीं पहुंच पाएंगे.
कमलनाथ के व्यवहार के बारे में लोग ये भी मानते हैं कि वे इतने शार्प हैं कि उनका बायां हाथ क्या कर रहा होता है, इसकी भनक वे दाएं हाथ तक को नहीं लगने देते हैं.
हालांकि उनकी आलोचना इस बात के लिए भी होती रही है कि वो एकदम से कोई स्टैंड नहीं ले सकते हैं और हर किसी से अच्छा संबंध बनाकर रखना चाहते हैं. मसलन, मध्य प्रदेश की राजनीति में ही बीते 15 सालों के दौरान उन्होंने कभी शिवराज सिंह चौहान का कोई मुखर विरोध नहीं किया.
मनोरंजन भारती कहते हैं- ये कमलनाथ की अपनी शैली है, वे काम करना और कराना जानते हैं. ये भी तो देखिए जब उन्हें मिशन दिया गया तो उन्होंने बेहद मुश्किल जाने वाले लक्ष्य को पूरा कर दिखाया.
वैसे कमलनाथ की पूरी सक्रियता के लिए उनके सलाहकार और सहयोगी आरके मिगलानी को भी श्रेय देना होगा जो बीते 38 साल से कमलनाथ के सहायक बने हुए हैं. मिगलानी के मुताबिक़ कमलनाथ अपने वादे कभी भूलते नहीं हैं. तो उम्मीद की जानी चाहिए कि मध्य प्रदेश की जनता से किए वादों को कमलनाथ ज़रूर पूरा करेंगे.

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